क्या आपने जानलेवा कपडे पहने है ?
हमारा भारत युवाओ का देश है आज देश में …फीसदी आबादी युवाओ की ही है और हर बदलती ज़रूरत के साथ देश में कई बदलाव देखने को मिल रहे है जिनमे से एक बेहद महत्वपूर्ण बदलाव कपडा व्यापर में हुआ है …कपडा। … यह हमारे जीवन की एक महत्वपूर्ण ज़रूरतों में से एक है एक कपडा ही हमारे व्यक्तित्वे को दुसरो के सामने रिप्रेजेंट करता है और बदलते वक़्त के साथ इन कपड़ो में एक नै तरह की तबदीली देखने को मिल रही है जहा दफ्तर से लेकर स्कूल कॉलेज और न जाने कितने मौको पर युवा अपने परिधान को बदलते है। .. जिसमे हर युवा या कह सकते है कि हर भारतीय खुद को दुसरो से अलग दिखने के लिए आए दिन नए फैशन के लिए तैयार बैठा है। .. और इसी का फायदा उठा रही है पोलिस्टर कम्पीय जो सस्ते दामों पर जयादा टिकाऊ और दिखने में ज्यादा अच्छा कपडा बेच कर मोटा मुनाफा कमा रही है। .. कम्पंयो के इस कारोबार में आम नागरिक उनकी गुडवत्ता को जांचे परखे आँखों पर पट्टी पढ़ क्र महज़ सस्ता ददम देख कर वह कपडा खरीद लेता है। …
क्या है पोलिस्टर और इसके नुकसान
पोलिस्टर कई तरह की केमिकल और डाइस से मिलकर बनता है। .. जिसका इस्तमाल लम्बे वक़्त तक करने से
शरीर में टॉक्सिन्स जमा हो सकते है जो स्कीन डेसेस और कैंसर जैसी गंभीर बीमारिया भी पैदा कर सकते है साथ ही हार्मोनल बॅलन्स का खतराअलग तो आपको हमारी यही सलाह होगी की अगर आप पोलिस्टर से दुरी बना क्र रखेंगे तो आपके शरीर और पर्यावरण दोनों के लिए ही भलाई है
पोलिस्टर का देश में बढ़ता कारोबार
गूगल से प्राप्त आकड़ो के मुताबिक चीन एशिया का सबसे बड़ा पोलिस्टर कपडा उत्पादक देश है इसी के साथ ही ताईवान जापान भारत और इंडोनेसिया भी पोलिस्टर के प्रमुख उत्पादक देश है। .अब हम बात करते है भारत में बढ़ते पोलिस्टर के कारोबार की तो देश में यह सिंथेटिक फाइबर बाजार में लगभग 77 से 80 फीसदी अपनी हिस्सेदारी रखता है अगर बात कुछ सालो पहले की। .. की जाए तो इसका बाजार7. 5 बिलियन डोलोर था…. जिसक वर्ष 2030 तक कुछ ही वर्षो में 14 बिलियन डोलोर तक पहुंचने का अनुमान है तो आप समझ ही गए होंगे की किस तरह से पोलिस्टर हमारे देश के कपडा मार्किट में अपनी पहुंच को गहरा करता जा रहा है जिससे हमें कई नुकसान भी है पोलिस्टर की उत्पादक कम्पनियो में जिओ और बॉम्बे डाइंग जैसे ख्याति प्राप्त ब्रांडो ने अपना दबदबा बना रखा है और मोटा मुनाफा भी लगते कमा रही है वही भारत सरकर ने हर घर तिरंगा अभियान में पोलिस्टेर के झंडो के निर्माण की अनुमति देकर इसी और बढ़ावा दिया
पोलिस्टर के पर्यावरण पर घातक प्रभाव
अब आपको जान कर बड़ी हैरानी कि इस पोलिस्टर को सड़ने में 200साल का समय लगता है जो पर्यावरण की लिए कितना घातक साबित होगा इसका अंदाज़ा आप लगा सकते है और इससे माइक्रोफाइबर भी निकलते है जो आपकी सेहत के लिए कितने घातक साबित होंगे इसके लिए आप खुद ही समझदार है
मासूम बच्चो के लिए हो सकता है जानलेवा
वर्तमान में माताए बाजार से बहुत सॉफ्ट और रंग बिरंगे कपडे अपने होने वाले शिशु या नवजात के लिए बाजार से लेकर आते है उस मर्म स्पर्श और उसके आराम को देख कर बड़े आनंदतीत होते है लेकिन आपको यह बता दे कि इससे निकलने वाले माइक्रो फाइबर्स आपके बच्चे की सास के माध्यम से अंदर जाकर लम्बे समय तक शरीर में ही बने रह सकते है चुकी इनका विघटन आसानी से नहीं होता इस लिए यह बड़ी बीमारी का घर साबित हो सकते है इसके बजाये आप सूती कपडे और ऊनि कपड़ो का इस्तमाल जो अगर शरीर में पहुच भी जाए तो आसानी से विघटित हो जाते है और बच्चे को इतना नुकसान नहीं पहुंचते
Written By…
Sadaf Khan